Saturday, April 11, 2009

अब मान भी जाओ


अगर तुम गुस्सा होती ,
तो मैं तुम्हे मना लेता
अगर तुम दूर होती ,
तो तुम्हे पास बुला लेता
अगर तुम उदास होती ,
तो मैं ख़ुद को रुला देता
पर अफ़सोस मुझे ये नही पता ,
की तुम क्या सोचती हो?
वरना कब का इसके लिए ,
मैं ख़ुद को सजा देता ,मैं ख़ुद को सजा देता

Sunday, November 9, 2008

मत देख निगाहों से ऐसी .....

मत देख निगाहों से ऐसी
अब जान निकल ही जायेगी
गर तू गलती से हँस देगी
सच है की क़यामत आएगी

Wednesday, November 5, 2008

तुम जिन्दगी हो

पहले मैं तनहा रहता था

तन्हाई में ये कहता था
आ मौत मुझे गले से लगा

कुछ झपकियाँ दे मुझे

एक मीठी सी नींद सुला

मैंने तुझको ढूँढा

ट्रेन की पटरियों पर

पानी की गहरायिओं और

फलक की उचाइयों पर

साँस रोक ली अपनी मैंने

फिर भी तू मिलने न आई

आकर तो अब देख जरा

जीवन में कितनी धुंध है छाई
पल पल मरता हूँ मैं अब तो

अपने गम के बोझ तले

अब तो नही है मेरा कुछ भी

दिल में जैसे आग जले

पर जबसे तुमको देखा है

जीने की ख्वाहिश जागी है

प्यार मिला तो मैंने जाना

अभी तो जीना बाकी है

अब जीना है तेरी खातिर

अब न मुझको मरना है

तुम जिन्दगी मेरी हर खुशी

मरने से क्या डरना है